अयोध्या। राम नगरी के विभिन्न क्षेत्रों में टेंपरेचर का स्तर पता करने के लिए दो मौसम केंद्रों की स्थापना।अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी और बेल्जियम की शोध संस्था व यूनिवर्सिटी की तरफ से साइन हुआ है।एएमयू आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी और अयोध्या के नगर निगम के भवन में स्थापित हुआ है मौसम केंद्र। हीट स्ट्रेस मैपिंग के जरिए नगर के मौजूद तापमान पर अध्ययन कर भविष्य का प्रारूप कराएगा उपलब्ध।अयोध्या के विकास में हरियाली के संरक्षण और संवर्धन के लिए अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी ने उठाया कदम। राम जन्मभूमि परिसर के बाहर भी स्थापित हुआ है मौसम केंद्र।राम जन्मभूमि परिसर में 70 एकड़ भूमि में मात्र 20 एकड़ जमीन पर ही निर्माण कराएगा राम मंदिर ट्रस्ट ।शेष 50 एकड़ जमीन पर विकसित की जाएगी हरियाली। हरियाली के संरक्षण और संवर्धन के लिए तापमान पर अध्ययन करेंगे विशेषज्ञ और शोधकर्ता।राम नगरी के विभिन्न क्षेत्रों में टेंम्प्रेचर का स्तर पता करने के लिए दो मौसम केंद्रों की हुई स्थापना।
अयोध्या। राम नगरी के विभिन्न क्षेत्रों में टेंपरेचर का स्तर पता करने के लिए दो मौसम केंद्रों की स्थापना।अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी और बेल्जियम की शोध संस्था भी तो यूनिवर्सिटी की तरफ से साइन हुआ है एएमयू आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी और अयोध्या के नगर निगम के भवन में स्थापित हुआ है मौसम केंद्र। हीट स्ट्रेस मैपिंग के जरिए नगर के मौजूद तापमान पर अध्ययन कर भविष्य का प्रारूप कराएगा उपलब्ध।अयोध्या के विकास में हरियाली के संरक्षण और संवर्धन के लिए अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी ने उठाया कदम। राम जन्मभूमि परिसर के बाहर भी स्थापित हुआ है मौसम केंद्र।राम जन्मभूमि परिसर में 70 एकड़ भूमि में मात्र 20 एकड़ जमीन पर ही निर्माण कराएगा राम मंदिर ट्रस्ट ।शेष 50 एकड़ जमीन पर विकसित की जाएगी हरियाली। हरियाली के संरक्षण और संवर्धन के लिए तापमान पर अध्ययन करेंगे विशेषज्ञ और शोधकर्ता।
शीतला प्रसाद पांडेय अयोध्या।सुल्तानपुर अयोध्या ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के लिए तहसील सदर के सूखापुर इटौरा गांव में शुरू नए सर्वे का ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है।ग्रामीण छह माह पूर्व सर्वे कर चिन्हांकित जमीन पर ही एक्सप्रेस वे बनवाने की मांग पर अड़े हैं।ग्रामीण इस बाबत भाजपा पूर्व सांसद लल्लू सिंह से भी मिल चुके हैं।बुधवार को जिलाधिकारी व मंडलायुक्त से मिल पुराना सर्वे बरकरार रखने की मांग रखेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि जब छह माह पूर्व दिल्ली की सर्वे कंपनी टीएससीएल द्वारा सर्वे व भूमि चिन्हांकन कर किसानों की मेढ़ों पर पिलर सीमेंट से जाम कर दिया गया तो अब दोबारा सर्वे की क्या जरूरत?इस बार किसानों की अत्यधिक उपजाऊ वाली जमीन लेने की कोशिश की जा रही है जिसका हम लोग विरोध करेंगे। किसानों की मांग है कि पुराना सर्वे ही बरकरार रखा जाय जिसका हम लोगों का कोई विरोध नहीं है जब कि उसमें भी हम लोगों की ही जमीन जा रही है।किसानों ने कहा कि हम किसी भी कीमत पर अपनी अत्यधिक उपजाऊ वाली जमीन देने को तैयार नहीं हैं।अगर यह जमीन ली गई तो किसान भूखों मर जाएंगे। फिलहाल उनके आवास पर मिलने गए ग्रामीणो...
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