माता पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म:आचार्य श्याम शास्त्री

अयोध्या।आचार्य श्याम सारथी जी महाराज ने कहा कि माता पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यह विचार उन्होंने पूराकलंदर के इटौरा गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस व्यक्त किया। आचार्य श्याम सारथी जी महाराज ने कहा कि जो पुत्र माता पिता गुरु आदि बड़ों के चरणों में झुककर प्रणाम करता है उसकी चार चीजें यथा आयु,विद्या, यश और बल बढ़ता है।उन्होंने कहा कि अगर किसी का बेटा संसार में बहुत उन्नति कर रहा हो तो समझ लेना चाहिए कि उसकी माता जी बहुत धार्मिक हैं और अगर बेटा नालायक निकल गया हो तो समझ लेना की गड़बड़ी पीढ़ी में है। माता पिता का आशीर्वाद पावर हाउस के समान है।जैसे पावर हाउस से बिजली ट्रांसफार्मर में आती है फिर एक एक केबल में आती है फिर हमारे एक एक आर्गन में आती है तब हमारे घर के पंखे लाइटें जलती है। ठीक उसी प्रकार से माता पिता का आशीर्वाद पावर हाउस के समान है। महाराज जी ने कहा कि गृहस्थ जीवन सुख का खजाना है। कहा कि पति और पत्नी परिवार के दो पहिए हैं अगर दोनों पहिया सही रहता है तब परिवार का रथ सही सही चलता है।अगर एक भी पहिया गड़बड़ हो तो परिवार का रथ सही-सही नहीं चल पाता। इसलिए पति और पत्नी को सुख दुख को समझते हुए अपने परिवार के रथ को चलाना चाहिए। कथा में मुख्य यजमान बलराम पांडेय, चंद्रप्रकाश, पं.शंकर नाथ पांडेय, पं. मनीष तिवारी, आचार्य चंदन शास्त्री आदि लोग मौजूद रहेअयोध्या।आचार्य श्याम सारथी जी महाराज ने कहा कि माता पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यह विचार उन्होंने पूराकलंदर के इटौरा गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस व्यक्त किया। आचार्य श्याम सारथी जी महाराज ने कहा कि जो पुत्र माता पिता गुरु आदि बड़ों के चरणों में झुककर प्रणाम करता है उसकी चार चीजें यथा आयु,विद्या, यश और बल बढ़ता है।उन्होंने कहा कि अगर किसी का बेटा संसार में बहुत उन्नति कर रहा हो तो समझ लेना चाहिए कि उसकी माता जी बहुत धार्मिक हैं और अगर बेटा नालायक निकल गया हो तो समझ लेना की गड़बड़ी पीढ़ी में है। माता पिता का आशीर्वाद पावर हाउस के समान है।जैसे पावर हाउस से बिजली ट्रांसफार्मर में आती है फिर एक एक केबल में आती है फिर हमारे एक एक आर्गन में आती है तब हमारे घर के पंखे लाइटें जलती है। ठीक उसी प्रकार से माता पिता का आशीर्वाद पावर हाउस के समान है। महाराज जी ने कहा कि गृहस्थ जीवन सुख का खजाना है। कहा कि पति और पत्नी परिवार के दो पहिए हैं अगर दोनों पहिया सही रहता है तब परिवार का रथ सही सही चलता है।अगर एक भी पहिया गड़बड़ हो तो परिवार का रथ सही-सही नहीं चल पाता। इसलिए पति और पत्नी को सुख दुख को समझते हुए अपने परिवार के रथ को चलाना चाहिए। कथा में मुख्य यजमान बलराम पांडेय, चंद्रप्रकाश, पं.शंकर नाथ पांडेय, पं. मनीष तिवारी, आचार्य चंदन शास्त्री आदि लोग मौजूद रहे

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