भव सागर से पार होने के लिए परमात्मा का भजन आवश्यक:पं मनीष पाराशर

शीतला प्रसाद पांडेय अयोध्या। विकास खंड पूराबाजार के मोहतसिमपुर मजरे साधो पांडेय का पुरवा में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पं मनीष पाराशर जी महाराज ने कहा कि भवसागर से छुटकारा पाने के लिए परमात्मा का भजन आवश्यक है। कथा व्यास ने कहा कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी महाराज से पूछा कि गुरुवर मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए शुकदेव जी ने कहा राजन मरने वाले व्यक्ति को विशेष करके तीन कार्य करने चाहिए। श्रवण, कीर्तन, स्मरण। भगवान की कथा को श्रवण करने से, भगवान का कीर्तन से और भगवान का ध्यान करने वाले सभी लोगों को मुक्ति मिल जाती है। कहा कि ध्यान, कीर्तन, स्मरण तभी संभव है जब आप अपने आसन और संग को जीत लेगे। अपने इंद्रियों को अपने बस में कर लेगे तभी भगवत प्राप्ति सुलभ है। कथा व्यास ने सती चरित्र बड़े ही भाव से श्रवण कराया। ध्रुव चरित्र श्रवण कराते हुए कहा कि ध्रुव जी भगवान कृष्ण का नाम लेकर भवसागर से पार उतर गए और ध्रुव लोक की यात्रा कर लिया। अगर मनुष्य को ध्रुव जैसा भक्त बनना है, भवसागर से पार उतरना है तो भगवान कृष्ण का नाम लेना ही पड़ेगा। कहा कि कृष्ण का नाम लेकर जो मर जाएंगे, वह अमर नाम दुनिया में कर जाएंगे। इससे पहले पूर्व कार्यवाहक जिला पंचायत अध्यक्ष करुणाकर पांडेय व पूर्व जिला पंचायत सदस्य गिरीश कुमार पांडेय डिप्पुल ने व्यास पीठ की आरती करके तीसरे दिन की कथा का शुभारंभ कराया। इस अवसर पर मुख्य यजमान गोरखनाथ पांडेय, राजेंद्र पांडेय, रवि पांडेय, सुरेश सिंह, शोभाराम वर्मा, रामकुमार वर्मा, बृजनंदन पांडे, प्रमोद श्रीवास्तव, लल्लन वर्मा प्रधान, बैजनाथ पांडे नारायनपुर, करुणाकर पांडे अलावलपुर, अरविंदलाल, झिन्कून पाठक, अधिवक्ता चंद्रमौलि सिंह, महेश पासवान सहित क्षेत्रवासियों ने कथा का रसपान किया।

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