*एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने रामलला के दरबार में लगाया हाजिरी*

शीतला प्रसाद पांडेय/अयोध्या। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह आज रामनगरी अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। दर्शन-पूजन के बाद उनका बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। *रामलला के दरबार में क्या बोले दिग्विजय सिंह?* राम मंदिर में दर्शन के बाद दिग्विजय सिंह ने भावुक अंदाज़ में कहा— “रामलला के दर्शन की मेरी लंबे समय से इच्छा थी… जब रामलला ने बुलाया, तब हम अयोध्या आ गए।” उन्होंने यह भी दावा किया कि राम मंदिर निर्माण में उनका भी योगदान रहा है, जो अब सियासी बहस का नया मुद्दा बन सकता है। *निर्मल खत्री से मुलाकात* दर्शन के बाद दिग्विजय सिंह सीधे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता निर्मल खत्री के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने उनके स्वास्थ्य का हालचाल जाना। यह मुलाकात राजनीतिक तौर पर भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि अयोध्या में कांग्रेस की सक्रियता को इससे नया संकेत मिला है। *कनक भवन पर ऐतिहासिक बयान** दिग्विजय सिंह ने अयोध्या के प्रसिद्ध कनक भवन में भी दर्शन किए और कहा कि इसका संबंध मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के महाराज से है। इस बयान से इतिहास और राजनीति दोनों में चर्चा तेज हो सकती है। *अयोध्या के विकास पर क्या बोले?* अयोध्या के तेजी से हो रहे विकास पर उन्होंने संतुलित प्रतिक्रिया दी— 👉 “एक-दो घंटे की यात्रा से विकास का सही आकलन नहीं किया जा सकता।” यानी उन्होंने न पूरी तरह तारीफ की, न ही सीधा विरोध—बल्कि एक राजनीतिक संतुलन बनाए रखा। *अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भाजपा पर निशाना* ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा— 👉 “भाजपा शासन में आम लोग गरीब होते जा रहे हैं, जबकि कुछ लोग और अमीर बन रहे हैं।” *पंचायत चुनाव पर बड़ा बयान* उत्तर प्रदेश के आने वाले पंचायत चुनाव को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा— “भाजपा सरकार कभी भी सत्ता के विकेंद्रीकरण के पक्ष में नहीं रही है।” यह बयान सीधे तौर पर भाजपा की ग्रामीण राजनीति पर सवाल खड़ा करता है। *2027 चुनाव पर चुप्पी* सबसे दिलचस्प बात यह रही कि 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। साथ ही मत्स्य मंत्री संजय निषाद के हालिया बयान/घटना पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। *लखनऊ के लिए रवाना* अयोध्या दौरे के बाद दिग्विजय सिंह लखनऊ के लिए रवाना हो गए, लेकिन उनका यह दौरा कई राजनीतिक संकेत छोड़ गया है।

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