भगवान भाव के भूखे: पंडित हरिशंकर* *पलिया रिसाली में भंडारे के साथ हुआ कथा का समापन*
शीतला प्रसाद पांडेय/अयोध्या।
ग्राम पंचायत पलिया रिसाली में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर कथा व्यास पंडित हरिशंकर जी महराज ने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते है धन के नहीं, श्रद्धा से अर्पित किया गया फूल भी परमात्मा सहर्ष स्वीकार कर लेते है।
कथा व्यास कहते है कि भजन हमेशा भाव से ही करना चाहिए भाव से किया गया भजन ही सार्थक होता है। कहा कि कथा आत्मज्ञान के लिए है उपदेश के लिए नहीं। कथा ब्यास ने कहा कि जीवन जीने की आदर्शमय शैली जहां प्रत्येक क्षण त्याग, समर्पण और करुणा के भाव जन्म लेते हैं जहां शत्रु के प्रति दया हो और सभी में ईश्वर का रूप नजर आने लगे वही धर्म है। कथा व्यास ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा प्रकांड विद्वान थे, ज्ञानी थे, उनके ज्ञान का विनिमय धन अर्जन के लिए नहीं है उनका ज्ञान भगवान के प्रसंता के लिए है। सुदामा चरित्र की कथा हमें निष्काम भक्ति सिखाती है। इससे पहले डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्रधान दुर्गेंद्र प्रताप सिंह डब्बल और गजेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से व्यास पीठ की आरती करके कथा का शुभारंभ कराया। समापन अवसर पर मुख्य यजमान हरीराम गुप्ता, माता प्रसाद, रामतेज गुप्ता, ओमप्रकाश, रामतेज, प्रदीप कुमार, रामानंद सहित ग्रामीणों ने कथा का रसपान किया और भंडारे में प्रसाद वितरण में सहयोग किया।*प्रदीप कुमार, रामानंद सहित ग्रामीणों ने कथा का रसपान किया और भंडारे में प्रसाद वितरण में सहयोग किया।



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